उदाहरण के लिए सूर्य हमसे करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर है पर उसके प्रकाश के कम और ज्यादा होने पर हमारी पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन होता है सूर्य की स्थिति परिवर्तन से हमारे शरीर की ऊर्जा प्रभावित होती है तो केसे ये न माना जाए की अन्य प्रभाव नही होते हैं ।।
चंद्रमा भी हमसे बहुत दूर है पर उसकी स्थिति हमको प्रभावित करती हैं उसकी स्थिति परिवर्तन से पृथ्वी पर ज्वार भाटा आता है समुद्र में, चंद्रमा मन को प्रभावित करता है ये ज्योतिष शास्त्र में माना है इसको कोई भी परख सकता हैं जब चंद्रमा अपनी पूर्णता की ओर होता है तो मन अच्छा होगा और जब वह कम होने लगता है तो हमारे स्वभाव में भी परिवर्तन होता है।।
ये तो सिर्फ दो ग्रह की बात है हमारे पूर्वजों ने ये शास्त्र तब लिख दिया था जब विश्व को कुछ भी नही पता था और विज्ञान सिर्फ उसी बात को स्वीकार करता है जिसको वो जनता है पर जिस चीज को अभी वो नही जानते हैं वो नही है ये तो विज्ञान भी सिद्ध कर सकता है क्योंकि विज्ञान पश्चिम देशों की देन हैं और हमारे पूर्वजों लिखा शास्त्र उनके कार्य और योग्यता का प्रमाण है ।।
दिखाई तो ईश्वर भी नहीं देते हैं पर विश्वास करते हैं ना, दिखाई तो हवा भी नहीं देती हैं पर होती हैं ना ।।
ज्योतिष भी एक पूर्ण प्रमाणित शास्त्र हैं उस को सही से जानने वाले लोग कम है इसका मतलब ये कदापि नही है कि ज्योतिष शास्त्र और ग्रह का प्रभावी नहीं है।।
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